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बे नमाज़ियों का दर्दनाक अंजाम

तौहीद अहमद ख़ान रज़वी

बे नमाज़ियों का दर्दनाक अंजाम
📅 02 Jun 2026 👁 165 Views

बे नमाज़ियों का दर्दनाक अंजाम

र्क़ुआने करीम और अहादीसे करीमा में जहाँ नमाज़ की फ़ज़ीलते बयान हुई हैं वहीं नमाज़ छोड़ने पर सख़्त वईदें भी सुनाई गईं हैं, चुनाँचे
अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है कि जहन्नमियों से पूछा जाएगा कि तुम्हें क्या बात दौज़ख में ले गई, तो जहन्नमी जवाब देंगें ‘‘हम नमाज़ न पढ़ते थे’’ (पारा 29)
दूसरी जगह अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है:
‘‘ तो उनके बाद उनकी जगह वह नाख़लफ़ आए जिन्होंने नमाज़ें गंवाईं और अपनी ख्वाहिशों के पीछे हुए तो अ़नक़रीब वह दौज़ख में ग़य्य का जंगल पाएंगें. (पारा 16)
ग़य्य क्या है? हज़रत इब्ने अब्बास रदि अल्लाहु अन्हुमा से मरवी है कि ग़य्य जहन्नम में एक वादी है जिसकी गरमी और गहराई से जहन्नम के और वादी भी पनाह माँगते हैं. (तफ़सीरे ख़ज़ाइनुल इरफ़ान)
हज़रत सदरूश्शरिआ़ अलैहिर्रहमा तहरीर फ़रमाते हैं कि ‘‘ग़य्य जहन्नम में एक वादी है जिसकी गर्मी और गहराई सबसे ज़्यादा है उसमें एक कुआँ है जिसका नाम हबहब है, जब जहन्नम की आग बुझने पर आती है अल्लाह तअ़ाला उस कुएं को खोल देता है जिससे वह बदस्तूर भड़कने लगती है’’ (बहारे शरीअत)
फ़रमाने इलाही है:
 ‘‘तो उन नमाज़ियों के लिए ख़राबी है जो अपनी नमाज़ से भूले बैठे है (यानि जो लोग नमाज़ों को उनके औक़ात से देर करके पढ़ते है)’’ (पारा 30)
वैल क्या है? वैल जहन्नम में एक वादी है अगर उसमें दुनिया के पहाड़ डाले जाएं तो वह भी उसकी शदीद गर्मी की वजह से पिघल जाऐं और यह वादी उन लोगों के लिए है जो नमाज़ों में सुस्ती करते हैं और उनको उनके औक़ात से देर करके पढ़ते हैं. (मुकाशफ़तुल क़ुलूब)
हुज़ूर अक़दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि जिसकी नमाज़ फ़ौत हो गई गोया उसके अहल व माल जाते रहे. (बुखारी शरीफ़)
अबू सईद रदि अल्लाहु अन्हु से मरवी कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि जिसने क़स्दन नमाज़ छोड़ दी जहन्नम के दरवाज़े पर उसका नाम लिख दिया जाता है. (अबू नईम)
हुज़ूरे अक़दस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि क़यामत के दिन सबसे पहले नमाज़ छोड़ने वालों के मूँह काले किए जाएंगें और जहन्नम में एक वादी है जिसे लमलम कहा जाता है उसमें साँप रहते हैं, हर साँप ऊँट जितना मोटा और एक महीने के सफ़र के बराबर लम्बा होगा वह बेनमाज़ी को डंसेगा और उसका ज़हर सत्तर साल तक बे नमाज़ी के जिस्म में जोष मारता रहेगा, फिर उसका गोश्त गल जाएगा. (मुकाशफ़तुल क़ुलूब)
हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक दिन सहाबा-ए-किराम से कहा कि तुम यह दुआ माँगा करो कि ‘‘ ऐ अल्लाह! हम में से किसी को शक़ी और महरूम न बना’’ फ़िर फ़रमाया जानते हो बदबख़्त और महरूम कौन होता है? सहाबा-ए-किराम ने अर्ज़ कियाः कौन होता है? या रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम! आपने फ़रमाया जो नमाज़ छोड़ने वाला होता है वही शक़ी और महरूम होता है. (मुकाशफ़तुल क़ुलूब)
अल्लाह तअ़ाला हम सबको नमाज़ की पाबन्दी करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए.। आमीन।